सिनेमा और समाज

सिनेमा का समाज पर प्रभाव हमेशा से ही रहा है प्रत्येक दशक में समाज वेशभूषा, रहन सहन का जो भी परिवर्तन होता है सभी 1989 पर सिनेमा का प्रभाव झलकता है। सिनेमा ने समाज मे फैली कुरीतियों को हटाने पर भी बहुत काम किया है। परन्तु आज सिनेमा ने भारतीय समाज की शालीनता को बिल्कुल किनारे कर दिया है। विवादित फिल्म पठान में जिस तरह के दृश्य फिल्माए गए हैं उनसे यह प्रतीत होता है कि भारत में भारतीय संस्कृति का स्थान पाश्चात्य संस्कृति ने ले लिया है। इसका प्रभाव समाज पर कितना खराब पड़ेगा। आने वाले समय में सभी युवा इन्ही वेशभूषाओं में नजर आएंगे। भारतीय संस्कृति के प्रति पाश्चात्य देशों मे कितना रुझान बढ़ रहा है वही हमारे देश में पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने पर बल दिया जा रहा है, समाज में बढ़ते अपराध के पीछे भी कहीं न कही फिल्मों का ही हाथ है। सेंसर बोर्ड तथा सरकार को इस ओर कुछ कदम उठाने ही चाहिए।सिनेमा और समाज

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